नीमच/मनासा। राजनीति में अक्सर अजब-ग़ज़ब किस्से सुनने को मिलते हैं, लेकिन इस बार नीमच ज़िले की ग्राम पंचायत सावन के सरपंच बाबू ने जो करतूत कर दिखाई, उसने सबको हंसी और हैरत में डाल दिया।
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स्वागत द्वार पर लगे थे मुख्यमंत्री जी और विधायक की तस्वीर[/caption]
मनासा-नीमच रोड पर बने स्वागत द्वार पर प्रदेश के मुखिया की तस्वीर लगी थी। मगर सरपंच जी का दिल तो अपनी "राजनीतिक सेल्फी" लगाने पर आया। सो, मुख्यमंत्री जी की तस्वीर को दबा दिया गया और उस पर चिपका दी अपनी और स्थानीय विधायक की मुस्कुराती तस्वीर।
लेकिन बारिश ने भी शायद यह राजनीति बरदाश्त न की. नतीजा, बैनर फटफटा कर लटक गया।
और इस नज़ारे से– सरपंच की "फोटो पॉलिटिक्स" पानी-पानी हो गई।
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सरपंच बाबू का कारनामा द्वार पर चिपका दिया ख़ुद का फोटो[/caption]
भारतीय जनता पार्टी जहां संगठन और अनुशासन के पाठ पढ़ाती रहती है, वहीं उसी पार्टी का सरपंच, मुख्यमंत्री की तस्वीर को ही किनारे करके अपनी राजनीति चमकाने पर उतारू हो गया। सवाल उठता है- जब नेता ही अपने आका की तस्वीर को नीचे दबा दें, तो जनता किस पर भरोसा करे?
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तेज बारिश ने खोली पोल, फटा पोस्टर निकले मुख्यमंत्री[/caption]
विवादों का पुराना खिलाड़ी.....
यह पहला क़िस्सा नहीं है जब सरपंच चर्चा में आए हों। दरअसल, साहब के निजी कारनामे भी किसी टीवी सीरियल से कम नहीं।
हिन्दू मैरिज एक्ट को ताक पर रखकर दो शादी रचा चुके हैं।
तीसरी कहानी में उज्जैन में सरपंच जी अपनी "आंगनवाड़ी प्रेयसी" संग रंगे हाथों पकड़ाए।
उस वक्त दूसरी पत्नी ने प्रेमिका की सरेआम धुनाई कर दी थी और मंज़र किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं था।
अब नई शिकायत यह है कि पहली पत्नी एसपी दफ़्तर के चक्कर काट रही है और आरोप लगा रही है कि सरपंच बाबू राजनीतिक रसूख के दम पर उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही।
राजनीति या नौटंकी?
स्वागत द्वार की तस्वीर से छेड़छाड़ हो या घर-गृहस्थी के ड्रामे, सरपंच साहब के कारनामे हमेशा सुर्खियां बटोर ही लेते हैं। अब सवाल यह है कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधि ही राजनीति को फोटोशॉप और फैमिली ड्रामा बना दें, तो जनता को इससे कौन-सा संदेश मिलेगा?