(धीरज नायक) नीमच। ज़िले में पिछले दिनों नकली 500 के नोट मामले में सिटी पुलिस ने कार्यवाही करते हुए, एक आरोपी को गिरफ्तार किया था जो बाज़ार में फ़र्जी नोट चलाने और अपनी किस्मत आज़माने निकला था। लेकिन सिटी पुलिस के ख़ुफ़िया तंत्र ने नकली नोट चलाने निकले, ईश्वरलाल खारोल की क़िस्मत पर पानी फैर दिया।

पुलिस ने ईश्वर को गिरफ्तार किया, नकली 500 रुपये के 50 हज़ार ज़प्त किए। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथी ग्राम सरजना के सुनील बैरागी (जिसने फ़र्जी नोट छापे) का नाम उगला, सिटी पुलिस ने एक्शन में आकर मास्टरमाइंड की तलाश शुरू कर दी और 10 दिसंबर को आरोपी सुनील बैरागी पिता श्यामदास बैरागी को भी गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

मामला यहीं नहीं रुका, इस कार्यवाही ने पुलिस पर कई सवाल खड़े किए हैं! सिटी पुलिस ने मामले में आधाअधुरा खुलासा किया।

विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो गांव सरजना में बीते 2 सालों से फ़र्जी नोट छपाई का अवैध कारोबार जारी था। लेकिन पुलिस ने ज़प्त किए केवल 50 हज़ार के नकली नोट? ऐसे में सवाल हैं कि लंबे समय से नकली नोटों की छपाई केवल 50 हजार ही हुए? सूत्र यह भी बताते हैं कि इस अवैध कारोबार में आरोपी सुनील के पिता श्यामदास बैरागी भी शामिल थे। जो पूरे खेल के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। यह गिरोह लंबे समय से फ़र्जी नोटों के "शाहिद" बने हुए थे! शुरुआत में इन्होंने 100 और 200 के नोट की छपाई की, जो बाज़ार में भी चलाए, धीरे―धीरे हौसले बुलंद होने पर 500 के नकली नोट निकालना शुरू किए।

सूत्रों के अनुसार चौकाने वाली बात तो यह हैं कि इनके द्वारा नकली करेंसी के करीब 2 करोड़ रुपए छापे गए, जिनकी सप्लाई भी की गई और लोकल में भी चलाए। लेकिन यह फ़र्जी नोट कहा–कहा खपाई किसी को मालूम नहीं?

ऐसे में बड़ा सवाल उठता हैं कि यह नेटवर्क कहा से संचालित हो रहा था?, कितनी नकली करेंसी इनके द्वारा छापी गई? इसका कोई खुलासा पुलिस ने नहीं किया।

अगर पुलिस मामले की जड़ तक जाए, आरोपियों की संपत्तियों की जांच की जाए तो और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस मामले में सिटी थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान से फोन पर चर्चा करना चाही तो उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।