नीमच। आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कृति और संत परंपरा का अनुपम संगम शनिवार को उस समय देखने को मिला, जब निरंजनी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के प्रथम नीमच आगमन हुआ।

नगर के टाउन हॉल में आयोजित विशाल आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर संत वाणी का श्रवण किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात, बैठक व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं महामृत्युंजय मंत्र के साथ हुआ। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाला जीवन दर्शन है।

उन्होंने कहा कि सत्य, सेवा, संयम और संस्कार भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं तथा इन्हीं मूल्यों के आधार पर मजबूत परिवार, सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्रपुरी जी महाराज सहित देशभर से पधारे संत-महात्माओं का सान्निध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद सुधीर गुप्ता, सांसद सी.पी. जोशी, विधायक दिलीप सिंह परिहार, विधायक ओमप्रकाश सकलेचा, विधायक अनिरुद्ध माधव मारू, विधायक श्रीचंद कृपलानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

भव्य आयोजन की व्यवस्थाओं का संचालन समाजसेवी संतोष चौपड़ा एवं रेणुबाला चौपड़ा के नेतृत्व में चौपड़ा परिवार द्वारा किया गया। संतों के स्वागत, श्रद्धालुओं की बैठक व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन एवं प्रसादी वितरण सहित सभी व्यवस्थाओं की उपस्थित श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने सराहना की।

नीमच की धरती पर आयोजित यह आध्यात्मिक महाआयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का एक यादगार अध्याय बन गया, जिसकी चर्चा नगरवासियों के बीच लंबे समय तक होती रहेगी।