नीमच। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के नीमच जिले के प्रसिद्ध श्री शिव शक्ति आश्रम, लेवड़ा में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत एवं भक्तजन पूज्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ संत श्री श्री 1008 श्री कमलानन्द गिरी जी महाराज की समाधि पर दर्शन एवं पूजन के लिए पहुंचे। पूरे आश्रम परिसर में "जय गुरुदेव" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

घने जंगल से लेवड़ा धाम तक की प्रेरणादायी यात्रा

आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं के अनुसार, 90 के दशक में पूज्य गुरुदेव जावद तहसील स्थित सांडेश्वर महादेव मंदिर के आसपास घने जंगलों में एकांत साधना किया करते थे। उस समय क्षेत्र में वन्यजीवों का भय भी बना रहता था।

इसी दौरान नीमच के प्रसिद्ध समाजसेवी अशोक अरोरा (गंगानगर) ने गुरुदेव की कठोर तपस्या और आध्यात्मिक साधना को निकट से देखा। उन्होंने सुरक्षा और जनकल्याण की दृष्टि से गुरुदेव को नीमच के समीप लेवड़ा क्षेत्र में एक उपयुक्त स्थान दिखाया। बताया जाता है कि स्थल का अवलोकन करते ही गुरुदेव ने इसे तपस्या के लिए श्रेष्ठ बताते हुए यहीं अपनी प्रमुख साधना स्थली बनाने का निर्णय लिया। समय के साथ यही स्थान हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

समाधि स्थल पर श्रद्धा का अटूट विश्वास

गुरुदेव के साकेतवास के पश्चात उनकी समाधि इसी पावन स्थल पर स्थापित की गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि आज भी गुरुदेव की आध्यात्मिक ऊर्जा इस धाम में अनुभव की जा सकती है। बड़ी संख्या में आने वाले भक्त समाधि पर नमन कर अपने जीवन में सुख, शांति और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं। आश्रम आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां पहुंचकर उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

गुरु पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक आयोजन

गुरु पूर्णिमा के साथ ही पूज्य गुरुदेव की जयंती के अवसर पर आश्रम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। वर्तमान महंत श्री कृष्णानन्द गिरी जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में सुबह 9:00 बजे पादुका पूजन एवं महाआरती तथा दोपहर 12:15 बजे विशाल महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज़ से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

आश्रम परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और गुरु परंपरा के इस पावन पर्व पर अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया।