(धीरज नायक)

नीमच। जिले में भू-माफिया और दलालों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सरकारी और औद्योगिक जमीनों का सौदा करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। नीमच के झांझरवाड़ा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) की करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को बेचने के लिए प्रशासन की नाक के नीचे एक बड़ा खेल रचा जा रहा है। आम जनता और निवेशकों को जाल में फंसाने के लिए खुलेआम अखबारों में लुभावने विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं।

मामला सामने आते ही प्रशासनिक हलकों और औद्योगिक गलियारे में हड़कंप मच गया है। MPIDC के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़े का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर FIR दर्ज कराई जाएगी।

अखबारों में विज्ञापन देकर बिछाया जा रहा जाल

चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा संस्करण के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित एक विज्ञापन ने इस पूरे रैकेट और घोटाले की तैयारी की पोल खोलकर रख दी है।

क्या है दावा?
 
विज्ञापन में झांझरवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया की 1 लाख 7 हजार वर्गफीट बेशकीमती भूमि को बिक्री के लिए उपलब्ध बताया गया है। खरीदारों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन में संपर्क सूत्र के तौर पर अशोक कुमार नामक व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया है।

इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट क्रमांक 74, 75 और 76 का सौदा

जांच-पड़ताल में सामने आया कि जिस जमीन का विज्ञापन देकर सौदा करने का दावा किया जा रहा है, वह इंडस्ट्रियल एरिया के प्लाट क्रमांक 74, 75 और 76 से जुड़ी हुई है।

         नियम क्या कहते हैं?

MPIDC द्वारा यह भूमि सिर्फ और सिर्फ उद्योग स्थापना के उद्देश्य से, सख्त नियमों और शर्तों के साथ 99 वर्षों की लीज (Lease) पर आवंटित की जाती है। इस भूमि को कोई भी व्यक्ति निजी संपत्ति बताकर न तो बेच सकता है और न ही इसका निजी सौदा कर सकता है।

मीडिया की पड़ताल में खुली पोल

मीडिया द्वारा जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई, तो सामने आया कि आरोपी दलाल यह झांसा दे रहे हैं कि यह भूखंड उद्योग लगाने वाले व्यक्ति को बेचा जाएगा। जबकि नियम के मुताबिक औद्योगिक भूमि का हस्तांतरण केवल और केवल MPIDC की लिखित अनुमति और तय प्रक्रियाओं के तहत ही संभव है।

जब विज्ञापन में दिए गए संपर्क सूत्र अशोक कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो वे सकपका गए। उक्त व्यक्ति ने किसी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कॉल काट दिया।

MPIDC के सब इंजीनियर अमित सोनी ने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में आ चुका है और इसकी पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों तथा मुख्यालय को भेज दी गई है। मुख्यालय से निर्देश मिलते ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि शासन की भूमि को अवैध तरीके से बेचने या धोखाधड़ी का प्रयास पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराई जाएगी।

ऐसे में अब गंभीर सवाल उठते हैं कि किसकी शह पर दलाल सरकारी जमीन का सौदा करने की हिम्मत जुटा रहे हैं? क्या इससे पहले भी इंडस्ट्रियल एरिया की जमीनों के नाम पर भोले-भाले निवेशकों से ठगी की जा चुकी है? प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस बड़े खेल में और कौन-कौन से भू-माफिया शामिल हैं?